This is the post excerpt.

Advertisements

!! तीसरा आदमी !!

एक आदमी कहता है
“हिन्दू”
दूसरा आदमी कहता है
“मुसलमान”
और एक तीसरा भी है,
जो कहता है-
“हिन्दू और मुसलमान”
दोनों शब्दों में भिन्नता है,
सक्रीय रासायनिक तत्वों के माफ़िक़
और ये हिस्सा लेते हैं,
प्रत्येक प्रगतिशील सामाजिक-रासायनिक
अभिक्रिया में,
बिलकुल वैसे ही जैसे-
ऑक्सीजन का एक परमाणु,
हाइड्रोजन के दो परमाणुओं के साथ-
अभिक्रिया करता है
और बनाता है पानी
तीसरा आदमी,
हमेशा इन तत्वों(हिन्दू और मुस्लमान) की अभिक्रिया कराता है
बिना किसी शर्त , समय , परिवेश-
और उत्प्रेरक के
और बनाता है पानी जैसे-
ही उपयोगी उत्पाद
पहले और दूसरे आदमी के पास-
भी तत्व है,
मगर अलग-अलग
और इनके तत्व भी हिस्सा लेते हैं
सामाजिक रासायनिक अभिक्रिया में
लेकिन एक विशेष शर्त,समय,परिवेश-
और उत्प्रेरक के साथ
अब,
खुद से सवाल करो
आप कौन हो??
क्या आप पहले और दूसरे आदमी हो ,
जो धार्मिक-कट्टरता , अंधता और-
अज्ञानता जैसे शब्दों से-
उत्प्रेरक का काम लेते हैं
या फिर तीसरा आदमी
जो एकता , समानता और भाईचारे-
जैसे शब्दों को लेकर-
प्रगतिशील सामाजिक आंदोलनों में हिस्सा लेता है

!! रोटी !!

(अ)

मैं लिखता हूँ

“रोटी”

और गरीब कहते हैं

“भूख”

जिसे आप देख सकते हैं

वहाँ , जहां रोटी नही होती

(ब)

भूख को धन्नासेठों से कोई दुश्मनी नही-

रोज गुजरती है उनके घर के सामने से

लेकिन मजाल है !!

जो नजर उठा कर भी देख ले

(स)

अब मैं लिखता हूँ

“भूख ”

और गरीब चिल्लाते हैं –

“निर्दयी और अन्यायी ”

भूख ढूंढती है ऐसे घरों को,

जहां कई दिनों से नही जलता चूल्हा-

और नही बन पाती रोटी

!! सपना !!

वो लिखती है

“रात”

और मैं कहता हूँ

“सपना ”

सपना एक जरिया है

उससे मिलने का

और ढेर सारी बाते करने का

जैसे कि उसकी पसंद और नापसंद

इस तरह –

सपना मेरा सबसे अच्छा शुभचिंतक है

क्यों कि सपने में हम –

अपने दुश्मन को काले पानी की

सजा दे सकते हैं

और बन सकते हैं –

किसी बड़े राज्य का राजा

!! अपराधी कवि !!

लोग कहते हैं

मैं कवि हूँ

लेकिन मैं सोचता हूँ

तब, जबकि

मेरी कविताएं –

ठहाके नही लगवा पाती

मेरी कविताएं –

किसी को रुला भी नही पाती

मेरी कविताएं-

कसीदे नही पढ़ती किसी की शान में

फिर आखिर,

मैं कौन हूं……